अंकुर सहाय दोहे

कद  अपना बढ़ जायगा, है ऐसा विश्वास।

चलो! उठा दें और हम, अब ऊपर आकाश।।

रोम-रोम शाकल्य है, समिधा जीवन-द्रव्य ।

मन अक्षत , तन पुष्प है; स्वांस-स्वांस है हव्य।।

‘अंकुर’ -मन के प्यास की, कौन सुनेगा पीर ।

चुप्पी सागर साध कर ,पी डाला सब नीर ।

जीवन भर था भागता,  फिर ली आंखें मूँद ।

गर्म तवे पर नाचती, ज्यों छन-छन-छन बूँद ।।

‘अंकुर’! मन के कुम्भ में, डाल प्रेम का इत्र ।

पीकर  महके मित्र बन, सारे शत्रु विचित्र ।।

रंच नहीं कटुता कहीं ,ऐसा हो संसार  ।

तब भव – सागर पार हो, तेरा-मेरा प्यार  ।।

आप सभी से पूछिए, मिलकर उनका क्षेम ।

जन गण मन में ‘आपके’, प्रति बस जाए प्रेम  ।

वर्तमान के भूत ने,  बदल दिया. परिवेश ।

दुःशासन फिर जी उठा, मरा  मरा लंकेश ।।

जब से रावण मार कर, आये हैं  निज धाम।

तब से अबतक रह रहे, तम्बू में  श्रीराम ।।

चाह न्याय की ; शीत से, बीते कितने जून ।

हुई ज़िन्दगी बाँसुरी, पगुराता  क़ानून ।।

पछताएं मत आप अब, करें हाथ से सैर ।

वक़्त भागता जा रहा , सर पर रखकर पैर।।

चुहिया भी निकली नहीं, खोदे खूब पहाड़।

ताड़ प्रश्न; हल तिल नहीं, तिल बन बैठा  ताड़।।

काशी ! बीती बात थी, हुआ बनारस आज।

परिवर्तन की आस में, गिद्ध बने अब बाज ।।

तन गौतम सा कर लिया,बैठा हृदय शचीश ।

और शिला रटती रही, तारो हे जगदीश ।।

घड़ा भरा जो पाप से , उसे हरेगा कौन ?

पूछ रही भागीरथी, उत्तर में हम मौन ।।

गुणा-योग के चिह्न को,सही-सही पहचान।

भाग रही है ज़िन्दगी, घटा जा रहा मान।।

जीवन सत्ता झूठ की, करके सच्चा भोग।

वाह -वाह करते हुए,  हवा हुए हैं लोग।।

तन पर तम छा जाय पर, बुझे न मन का दीप।

मन है मोती प्रेम का, तन है उसका सीप।।

कौन छला ? किसको छला ? , किसकी कैसी चाल।

सस्ता जीवन हो गया,  मँहगी रोटी दाल ।।

काँव-काँव हर ओर है, नहीं छाँव में ठाँव ।

राम हुए राजा ! पड़ा, आज कीच में पांव ।।

नैन निहारे नेह से, नभ के भी उस पार ।

जहाँ ईश साकार हो,हो प्रियतम का द्वार ।।

नये दौर का आदमी,बदल रहा है ढंग ।

रंगत उसकी देख के , है गिरगिट भी दंग।।

ख़त्म हुई संवेदना, आज हुए निष्प्राण  ।

कब आंसू की धार ने , पिघलाये पाषाण ।।

अम्मा बूढ़ी हो गयी,रही एक ही चाह ।

बच्चे को मेरे कहीं, लगे न कोई आह ।।

बदल गए हालात अब, बदल गए संयोग ।

रिश्ते भी  कपड़े हुए, रोज बदलते लोग।।


अंकुर सहाय “अंकुर

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu