झुलसता किसान

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झुलसता किसान

By |2018-01-21T16:29:57+00:00January 21st, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

झुलसता किसान

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जो पालनकर है जन -जन का

जो संभल है जीवन का

जिसके होने से हो क्षुदा शांत

जिसके होने से हो हरित क्रांति

वह है धरती पुत्र किसान ……

वह है भूमि पुत्र किसान……

 

कठिन परिश्रम करके वह जीवन को जीता

उसका जीवन है जैसे कोई रामायण गीता

जिसकी मेहनत का ही फल सब खाते है

जिसके बच्चे बिलख भूख से सो जाते है

दूजो को जीवन देकर वह करते करम महान..(१) वह धरती पुत्र किसान,वह भूमि पुत्र किसान….

 

देश बढ़ेगा तब ही ,जब उन्नति करे किसान

कहते है नेता जी ,उन्हें बोट बैंक का ध्यान

वादे बस झूठे वादे ,नही कुछ भी तो साकार हुआ

कभी खेल खिलाया सूखे ने ,जीना भी दुस्वार हुआ

देख-देख  सरकारी नीते ,अधर में अटकी जान ..(२)

वह है धरती पुत्र किसान ,वह है भूमि पुत्र किसान..

 

भूख से मरते बच्चों की ,वह लाशे कैसे देखेगा

थे हरियाली सपने जो ,उन्हें कैसे उजडते देखेगा

इससे तो मर जाना अच्छा ,कही नीर में जाये डूब

हालात उसे पल पल मारेंगे ,इसे जानता है वह खूब

निर्मोही सरकारों के नहीं खड़े हुए  अब तक है कान …(३)

वो है धरती पुत्र किसान, वो है भूमि पुत्र किसान……

 

अगले पखवाड़े में उसकी बेटी की शादी थी

मंजूर नहीं था विधना को ,जो की ऐसी बर्बादी थी

कैसे वह घर आये मेहमानों का सत्कार करेगा

कैसे? अपनी लाडली के पीले हाथ करेगा

हाय! बिधाता रूठ गया ,जो चूर हुए उसके अरमान …(४)

वो है धरती पुत्र किसान, वो है भूमि पुत्र किसान…

 

उसके कठिन परिश्रम का,यह कैसा उपहार मिला

अन्नदाता है वह जग का ,फिर भी न उसको प्यार मिला

समझ न पाया क्योकर मेरे हृदय घृणा पनपी

धैर्य धरण करने को कहते,ओर सुनते कुछ उसके मन की

शायद वह मेरे सम्मुख होता ,जिसने दी थी कल जान …(५)

वह है धरती पुत्र किसान, वह है भूमि पुत्र किसान…

 

सरकार मौन ,बुद्धिजीवी भी खामोश हो गए

फिर से सुरा-सुंदरी  के   प्यालो में खो गये

ये ढीट इतने हैं कि जगाने से न जाग पाएँगे

सुरसा सा मुँह फाडे है ,सारे किसान खायेंगे

फिर करेंगे मेरे प्यारे देश का उत्थान…..(६)

वह  है धरती पुत्र किसान. वह  है भूमि पुत्र किसान…..

 

अभी हाल में ऋिण माफी का आयोजन सफल हुआ

किसानो के दुख हरने का   प्रयोजन   सफल हुआ

बीस,पच्चीस ,तीस पैसे  माफ कर दिए सरकार ने

बस उनकी खिल्ली ही उडाई है ,इस उपहार ने

कर्ज माफ कर इतराते नेता ओर बनते हैं महान…(७)

वह  है धरती पुत्र किसान, वह  है भूमि पुत्र किसान…..

 

जब खुदकुसी करता किसान ,तो मरता सब परिवार

वो कंधे ही टूट गये जिन पर था सबका ही भार

कैसे ‘राघव’ उनका कृंदन लिख पायेगा

धरती फट जाएगी ,अंबर झुक जाएगा

है  करुणाकर ,करुणा कर, न  रोये एक किसान ..(८)..

वह  है धरती पुत्र किसान ,,वह है भूमि पुत्र किसान…

 

राघव दुबे

इटावा (उ०प्र०)

8439401034

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