गांव में अधेड़ उम्र की एक महिला रहती थी। उसका नाम उमावती था अगर उसको ध्यान से देखो लगता था कि वह अपनी युवावस्था में में सुंदर रही होगी उसका पति वहीं बहुत बड़े व्यापारी के यहाँ काम करता था। और वह उस व्यापारी के यहाँ ही रहता था। कभी-कभी उमावती के पास आता था जैसे ही वह घर आता उमावती उसे गालियाँ देने लग जाती थी तंग आकर वह फिर व्यापारी के पास चला जाता था धीरे-धीरे उसका आना कम होता गया।
समय के साथ उमावती की हालत बिगड़ने लगी। और वह पागलपन की श्रेणी में आने लगी चाहें जब गालियाँ देने लग जाती थी बाल बिखरे हुए कपड़े भी फटे पुराने गंदे इतने की जैसे सालों से धुले ही न हो खाना उसे बनाते कभी नहीं देखा गया जाने वह अपना पेट कैसे भरती थी जब वह सड़क पर जाती थी लोगों को देख गालियाँ देना शुरू कर देती बच्चे उसे देखते तो हंसने लगते साथ ही चिढ़ाया करते वह डंडा लेकर बच्चों के पीछे-पीछे भागती कभी बच्चे आगे आगे भागते तो कभी वह बच्चों से आगे भागती थी बच्चे उसे पगली पगली कहा करते थे धीरे-धीरे उसका नाम ही पगली पड़ गया।
सभी बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों को रोकते थे और पगली के पास जाने को मना कर देते थे पगली को देखकर सभी अपने अपने दरवाजे बंद कर लेते थे किसी किसी को दया आ जाती तो उसे जाकर रोटियाँ पकड़ा देते थे। पगली कभी कभी बहुत जोर जोर से से रोने लगती जिसकी आवाजें चारों ओर गूंजती थी, वह अक्सर मंदिर में जाकर रोती थी रोने की आवाज इतनी करूण होती लोगों की आंखों में आंसू आ जाते थे। कभी अपने पति के कपड़े पीटा करती थी जाने पगली की अपने पति से क्या दुश्मनी थी।
धीरे-धीरे पति का उसके पास आना कम हो गया। वह व्यापारी के पास ही रहने लगा और अचानक उसके पति की मौत हो गई। व्यापारी के नौकरों ने आकर पगली को बताया। लेकिन पगली के ऊपर कोई असर न हुआ।
समय निकल रहा था पर पगली हालात में सुधार न हुआ।
एक दिन गांव में शोर मचा कि उस व्यापारी की मौत हो गई प्रतिष्ठित व्यापारी था, उसके निवास पर हजारों की संख्या में भीड़ इकठ्ठी होगई उसके शव को श्मशान घाट लेकर जाने लगे लोगों की इतनी भीड़ थी कि खड़े होने की भी जगह नहीं मिल रही थी लेकिन जगह बना पगली शव यात्रा में शामिल हो गयी और धक्का मुक्की कर शव के पास आ गयी, सभी व्यक्ति दाह-संस्कार कर वापस आ गये लेकिन पगली वापस नहीं गयी। जहां व्यापारी का दाह-संस्कार हुआ था वहाँ जाकर फूट फूट कर रोने लगी रोने की इतनी दर्दनाक आवाजें थी ऐसा लग रहा था वहां पेड़ पौधे पशु पंक्षी उसके साथ रो रहे हो चीत्कार दिल दहला देने वाली थीं। आखिर समझ नहीं आ रहा था उसका व्यापारी से नाता क्या था।
इस रहस्य को कोई नहीं समझ सका।।

#नीरजा शर्मा #

Rating: 3.7/5. From 3 votes. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *