बचपन की वो बातें प्यारी
अपने होते खेल निराले
कभी बन जाते रेलगाड़ी
छुकछुक चलती अपनी गाड़ी
काला दीपू इंजन बन जाता
हम सब डिब्बे बन कर चलते
छुप्पनछुपाई हम खेला करते
कभी आ जाती खों खों की बारी
कभी बाइस्कोप वाला आ जाता
बारी बारी सब देखा करते
जीवनी होती नेहरू गांधी की
पतली पतली मेड़ों पर चलते
गिरने से कभी ना डरते
किक्रेट भी जम कर होती
कभी हो जाती खूब लड़ाई
पल में लड़ना पल मिलना
धूम मचाया करते हम सब
वो दिन थे कितने प्यारे
सब मिल जब खेला करते
बचपन की वो बातें प्यारी
वो होते खेल निराले
#नीरजा शर्मा #

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