जय हिंद जय भारत

ये नारंगी हरा सफेद रंग है
कौन देश की बाला तुम हो
यहां किस काम से गुजरिया
काहे इतनी उदास खड़ी हो
किसी बात से नाराज तुम हो
ये भारत का लहराता ध्वज है
बाला जिसे पहने खड़ी हो
मैं भारत माता हूँ प्यारो
विचरण करने आयी देश का
यहां के हालात बड़े दुखदायी
अतिभष्टाचारी तुम बन गये हो
ऐसा लगता रावण की लंका
अत्याचारी बलात्कारी बने हो
बालिकाओं को दुख दे रहे हो
बहुत दुखी आत्मा से रोयी
तुम मेरे बच्चे हो प्यारे
इंसानियत कहां खो गई
बस धर्मों में बंधे हो
मेरे बच्चों जिम्मेदारी संम्भालो
भारत को विश्व गुरु बना दो
संस्कारों से भरा देश को कर दो
विश्व में भारत की पहचान बना दो
#नीरजा शर्मा #
यह एक काल्पनिक कविता है। ऐसा लगता है भारत मां आज अपने देश के भ़मण पर निकली और उनके मन के इस तरह के विचार उठ रहे हैं ।।
।। भारत माता की जय।।
आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं

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