बचपन का हसीन चेहरा

बचपन का हसीन चेहरा

By |2018-01-30T17:10:02+00:00January 30th, 2018|Categories: कविता, बचपन|Tags: , |2 Comments
खो गया ,
 भीड़ में मेरा वो चेहरा
 मासूम था
 नापाक था
 निश्‍छल था
 वास्‍तविक था जो।
गुम हुआ बचपन की गलियॉं छूटते ही
चढ़ता चला गया,
नकाब पर नकाब
असत्‍य का ,
फरेब का, 
छल का,
शायद,
हॉं शायद ही कभी मिल पाए
वो चेहरा
जिस पर न हाेगा नकाब
बाहर-भीतर से एक समान
स्‍वच्‍छ पानी सा निर्मल 
सफर में छूटे सामान की तरह
शायद ही मिल पाएगा
मेरा वो हसीन चेहरा,
बचपन का ।
काश 
फिर से मिल जाए मुझे
मेरा वो खोया चेहरा।

Comments

comments

Rating: 4.5/5. From 2 votes. Show votes.
Please wait...
Spread the love
  • 5
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    5
    Shares

About the Author:

Working as Translator for the last 17 years.

2 Comments

  1. saurabh_1 January 30, 2018 at 9:50 pm

    यथार्थ समेटे हुवे आपकी ये रचना बहुत की सुन्दर है|

    Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
    Please wait...
  2. Anju February 6, 2018 at 2:36 pm

    धन्‍यवाद सौरभ जी

    No votes yet.
    Please wait...

Leave A Comment