लौटकर आया है बचपन
फ़िर मुस्कुराया है बचपन

दूर अपने हो गये जब
फ़िर से वो लाया है बचपन

एक नन्हा प्यार का फल
ले के फ़िर आया है बचपन

अक्स अपना देखकर के
ख़ुद का फ़िर पाया है बचपन

एक किलकारी सुनी है
हंस के बौराया है बचपन

है न शिकवा भी किसी से
वक़्त ने खाया है बचपन

बचपना ‘आनन्द’ कैसा
ज़ह् न पर छाया है बचपन

स्वरचित
डॉ आनन्द किशोर
दिल्ली

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One Comment

  1. बहुत ही सुन्दर!!

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