प्रभात की बेला आए
धूप चमकते पौधे
चारों ओर सुनहरी छाया
फूलों की अदभुत शोभा
गुंजन भवरों का अनोखा
कलिका मोहित सा करती
शाखाएं रमणीय मुझ पर
ये रुप सलोना मेरा
पवन बार बार दें झोंके
मुझे प्रेम गीत सा लगता
आदित्य नमन तुझे मेरा
भर दे तु अपनी आभा

#नीरजा शर्मा #

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