मै कन्या हूँ एक अजन्मी

माँ के गर्भ मे मै पनपती

इस जग को अभी न देखा

मै हूँ अभी गर्भ मे पलती

मै मानव का क्लेश नही हूँ

मै जीवन का द्वेश नही हूँ

मुझको तुम संसार मे लाओ

मै खुशीयाँ हूँ हर आँगन की

मै लक्ष्मी हूँ हर आँगन की

मै बगियाँ हूँ हर सावन की

मुझको तुम अब अपनाओ

मुझको तुम शिक्षित बनाओ

हर शत्रु पर मै वार करूगी

मै देश का नाम करूगी

मुझको तुम स्वालंब बनाओ

मै पापा तेरा नाम करूगी

मै पापा की लाडो बिटियाँ

मै मम्मा की प्यारी गुड़ियाँ

मेरा तुम धंसन न करना

मुझसे घर की लक्ष्मी आती।

 

स्निग्धा रूद्रा

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