मुफलिसों के जख्म पे कोई दर्द क्यों नही होता
वेदनाएं दिल में हो पर आँख ये नही रोता नही
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रात की खामोशियो से दोस्ती अब होगी
जुगुनू अपनी रौशनी अँधेरो में नही खोता नही
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बेबसी लाचारियों की चुप्पियाँ कब तक सहे
दुस्वारियो की जिंदगी अश्को से तो धोता नही
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स्वार्थो की दोस्ती इंसानो में अब हो गयी
जो तड़पता भूख से वो चैन से सोता नही
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जंगलो के जानवर से हो गए हम क्यों यहां
इंसानियत खोकर कोई इंसान तो होता नही
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प्रिय नही कोई शिवम् है बिन जरूरत के यहा
भाव कोई प्रेम का अब पिरोता है नही!

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