सियासत में नहीं फंसना, जुबां दो धारियाँ होंगी…
बहुत सोची, बहुत ओछी, उनकी तैयारियां होंगी…
बहकायेंगे बहुत हमलोगों को,  अब खुद समझना है…
हमारा ही गला होगा, हमारी आरियाँ होंगी…

– वंदना अहमदाबाद

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