सियासत में नहीं फंसना, जुबां दो धारियाँ होंगी…
बहुत सोची, बहुत ओछी, उनकी तैयारियां होंगी…
बहकायेंगे बहुत हमलोगों को,  अब खुद समझना है…
हमारा ही गला होगा, हमारी आरियाँ होंगी…

– वंदना अहमदाबाद

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *