आप हमसे जुदा हो गये
चांद तारे ख़फ़ा हो गये

हमको कहकर गये बेवफ़ा
और ख़ुद पारसा हो गये

ले के मासूम चेहरा भला
क़ातिलों की अदा हो गये

जो गुज़ारे थे पल साथ में
उम्रभर की सज़ा हो गये

पल में आंधी चली इस क़दर
ख़्वाब सारे हवा हो गये

पार हद जब हुई दर्द की
दर्द सारे दवा हो गये

दिल के जज़्बात उमड़े हैं जो
आंसुओं की रिदा हो गये

( रिदा = चादर )

ज़िन्दगी लाश की है तरह
इश्क़ में हम फ़ना हो गये

आशिक़ी का असर वो दिखा
क्या से ‘आनन्द’ क्या हो गये

स्वरचित
डॉ आनन्द किशोर
दिल्ली

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