तीरगी के फ़रेब

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तीरगी के फ़रेब

By |2018-02-12T08:32:00+00:00February 12th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

तीरगी के फ़रेब खाता हूँ
रौशनी को भी आज़माता हूँ

रोज़ चुपके से टूटने पर भी
ख़्वाब कितने मगर सजाता हूँ

आग में याद कब जला करती
आग हर बार पर लगाता हूँ

इसको किस्मत ही मानकर अपनी
हर घड़ी आपसे निभाता हूँ

दिल की डोली सजी है आ जाओ
रोज़ आवाज़ मैं लगाता हूँ

वक़्त की कामयाब साज़िश है
उसके आगे मैं सर झुकाता हूँ

जो न ‘आनन्द’ कह सका अब तक
राज़ उनको वही बताता हूँ

स्वरचित
डॉ आनन्द किशोर
दिल्ली

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~~~~~~~||| * परिचय *|||~~~~~~~ नाम : डॉ आनन्द किशोर ( Dr Anand Kishore ) उपनाम : 'आनन्द' सुपुत्र श्री लेखराज सिंह व श्रीमती रामरती धर्मपत्नी : श्रीमती अनीता पता : मौजपुर , दिल्ली शैक्षिणिक योग्यता : M.B.,B.S. सक्रिय लेखन : ग़ज़ल, कविता, गीत में विशेष रूझा

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