सूरत सुहानी  देख  तुम्हारी  भूल  गए  हम तो  रब  को ।

तेरा  चेहरा  याद  रहा  बस  भूल  गए  हम  तो  सबको ।

 

चंदा ने  भी  तुझ  से  ही   यह   रंगत   अपनी   पाई   है ।

तेरे रूप  की  अरुणाई   से   कलियां   भी   मुस्काई   हैं ।

 

प्यार भरी इस मधुर डगर पर मिलकर साथ चलेंगे  हम ।

मिलन  तेरे  में  हम  तो  प्रिये  भूलेंगे   दुनिया  के   गम ।

 

तेरे  जैसा  इस  दुनिया  में  मिला  हमें   अवलंब   नहीं ।

तेरे  बिन  अब  तो  मेरा  है  कोई   भी   आलम्ब   नहीं ।

 

प्रेम फुहार से सराबोर हैं अब  तो  तन  मन  दोनो  मेरे ।

सुबह सलिल हुई खुशी की छंट गए गम के  मेघ  घनेरे ।

 

तेरे मेरे  अधरों  पर  हरदम  बस  यों  ही  मुस्कान  रहे ।

एक दूजे के प्यार का दिल में बस यों  ही  सम्मान  रहे ।

 

– कवि बिहोरसिंह “बिहोर”

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