प्रतिस्पर्धा

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प्रतिस्पर्धा

राहुल   अपनी  कक्षा   का   सबसे   मेघावी   व्  बुध्धिमान  छात्र   था. पढाई   के साथ-साथ   वह   विद्यालय   में होने वाली अन्य  गतिविधियों-खेल कूद व् सांस्कृतिक   कार्यक्रमों   में भी बढ़-चढ़  के भाग लेता था.  विद्यालय   के   प्रधान- अध्यापक  ,अध्यापक -गण  और खुद उसके माता-पित उस पर नाज़  करते थे.  उसे विद्यालय   की शान समझा जाता था. राहुल भी  अपनी   इन  उपलब्धियों  से और सबका प्यार पाकर बहुत प्रसन्न रहता था.  मगर इस वजह से  उसमें कुछ-  कुछ अभिमान   सा घर कर गया था.  वोह   अपने   कक्षा   के सहपाठियों से  ठीक से बात तक नहीं करता था  ,मदद करने की तो बात ही छोड़  दो  मगर   उसपर   कोई आक्षेप   तक नहीं लगता था.  वोह विद्यालय  शान जो था  ,भई!
मगर  कुछ दिनों  से  उसका  स्वभाव  और भी  जाएदा कुद्ध ,  चिड- चिड़ा   सा हो गया था.  पढाई  में  भी  उसका दिल नहीं लगता .इसका कारण   यह है की   उसके विद्यालय   ,बल्कि उसकी कक्षा  में एक नया छात्र   आया  है  समीर . वोह   राहुल की तरह  धनि परिवार से तो नहीं है ,मगर हाँ उसके गुण ,संस्कार  ,बुध्धिमता,आचरण उसे ज़रूर   धनी  बनाते हैं .  पढाई-लिखाई  व् अन्य गतिविधियों में  भी  वोह राहुल से आगे है.  उसकी पिछला रिकॉर्ड  देख कर  खुद  प्रधान-अध्यापक  दंग रह गए,  और उसपर प्रभावित हुए बिना नहीं रहे. अब  तो यह आलम हो गया की  राहुल से ज्यदा समीर  विद्यालय  के   अध्यापक गण और   छात्र  -छात्राएं   उसका गुण गाने लगे.  जिसे देखकर राहुल के मन में समीर के प्रति ,नफरत  व्   जलन   पैदा होने लगी. फिर उसका ध्यान पढाई में कैसे लगता.! सारा समय उसका दिल -ओ-दिमाग में समीर  को नीचा  दिखाने के  मनसूबे  बनते रहते थे  .मगर एक भी कामयाब नहीं होता बल्कि  होता यूँ था की जो जाल वोह समीर के लिए तैयार करता उसमें खुद ही फंस जाता. जिसकी वजह से वही   सबकी  हंसी या क्रोध  का भाजन बन जाता . क्योंकि  समीर   था तो एक शरीफ बच्चा  मगर  वोह अक़मंद भी बहुत था.  वोह  इस   विद्यालय  में आते ही   राहुल को  अच्छी तरह समझ गया था  .मगर उसने  राहुल के साथ सामजस्य बिठाने की बहुत लोशिश  की .समीर तो बल्कि  राहुल की नादानीयाँ अधिकतर छुपा लेता था. सह लेता था  मगर किसी से शिकायत कभी नहीं करता  था.  राहुल अगर कभी  बड़ों  की डांट  तो अपनी ही नासमझी की वजह से.
राहुल तो समीर को अपना  दुश्मन ही समझता था.  उसके मन में नकारात्मक   विचार बुरी तरह से घर कर गए थे.  की एक दिन   तो उसने हद ही कर डाली  .   उसने   धोके से   समीर का स्कूल  -बैग उठाया और  तालाब  में फेंक दिया  ,जिससे सारी   किताबें कापिया बर्बाद हो गयी .  समीर  को मालूम  पड़ा  तो  वोह झट से  तालाब की और भागा .मगर अब वोह कुछ कर नहीं सकता था. वहीँ बैठ कर रोने लगा. उसका रोना सुनकर   सारा स्कूल  उसके  पास   इकठ्ठा हो गया.  प्रधान-अध्यापक और शिक्षक-गण  और विद्यार्थी ..सब उसके पास  आये  और  उसके रोने का कारण पूछा तो उसने तालाब की और इशारा कर दिया. प्रधान-अह्यापक   ने बढ़ के  तालाब की और देखा तो दंग रह गए   और उसे ढाढस  बंधाने लगे.  प्रधान  अध्यापक जी ने  इस बारे में तफ्तीश करवाई  तो मालूम पड़ा राहुल  इसका कसूरवार है .वोह अपना आपा  खो बैठे और  उन्होंने राहुल के माता पिता को तुरत विद्यालय में बुलवाया और सारी कहानी कह डाली .  राहुल के माता-पिता को बहुत शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा और उन्हें बहुत गुस्सा  भी आया .  राहुल और समीर को बुलाकर  राहुल  को समीर से माफ़ी मांगने का हुक्म दिया .समीर का नुक सन पूरा करने के उद्देश्य  से उसे   नयी किताबें-कापियां स्कूल-बैग समेत सब  खरीद कर दीं. .यह भरपाई  भी राहुल के माता-पिता को करनी पड़ी . क्योंकि यही  न्याय संगत था.
बात यहीं तक ख़तम नहीं हुई प्रधान-अध्यापट  ने राहुल के माता-पिता को  कहा,” की आप इसे ले जाकर अच्छी तरह समझाईये ,कहीं ऐसा न हो यह भविष्य में  फिर ऐसा   गलत क़दम उठाये  और हमें इसे विद्यालय  से निकालना  पड़े.यह विद्यालय  का सबसे होशियार बच्चा रहा है इसीलिए  हम इस बात का  लिहाज कर रहे हैं  और अब तक करते रहे हैं..मगर अब आगे नहीं कर पाएंगे,हमें माफ़ कीजियेगा.”   उन्होंने फिर कहा,” आप  का बेटा कुछ दिनों से   ठीक   से   पढने में भी दिल नहीं लगा रहा. और समीर  के साथ हमेशा उलझता रहा है.अब आप ही  यह पता लगायें,की आखिर   इसके इसतरह  बदल  जाने का क्या कारण है.आखिर कर आप इसके माता-पिता हैं.”
घर आकर   राहुल के  माता-पिता ने पहले तो खूब फटकार लगायी ,पिता तो उसे पीटने  तक लगे थे मगर माँ ने रोक लिया और   अपने पति को शांत रहने के लिए कहा ,और खुद राहुल को लेकर उससके कमरे में गयी और अंदर से दरवाज़ा बंद  कर  दिया और  उसे  कहा,”  अब बता!   देख  !  तेरे पापा-  और मैं तेरे दुश्मन नहीं  है,तेरे भले के लिए तुझे डांटते हैं  राहुल ! बेटा! मुझसे कुछ मत छुपाना ,तू मुझे अपनी  दोस्त मानता है  ना ,और दोस्त से तो कुछ नहीं  छुपाना चाहिए .बता  ! मैं  देख रही हूँ ,और मुझे यह एहसास हो रहा है की  तू मेरा इतना लायक बेटा होकर अचानक   गन्दा बच्चा कैसे बन गया
? क्यों तेरा पढाई में मन नहीं लगता ? और क्यों तू  पिछड़ता   जा रहा.आखिर इन सब की वजह क्या है ? समीर से तेरी क्या   नाराज़गी है?मुझे खुल के बता,”    राहुल माँ का  प्यार-दुलार भरा  स्पर्श व बातें   सुनकर  फुट-फुट के रोने लगा और अपने दिल का सारा हाल कह दिया ” माँ! मेरी   इस हालत का ज़िम्मेदार समीर है ,वोह जबसे आया सब उसी का गुण गाने लगे,उसकी ही तारीफ करने लगे ,मुझे  तो सबने जैसे अनदेखा कर दिया ,वोही सबकी नज़र में हीरो  बनके बैठ गया है. मुझे तो कोई पूछता  ही नहीं ,मुझे उससे जलन होने लगी   है कल तक तो में इस स्कूल का champion था आज यह हो गया क्यों?  ”
राहुल की माँ ने उसे प्यार से समझाया  ,” बेटा!  प्रतिस्पर्धा  सिर्फ  पढाई  या खेल-कूद में ही नहीं होती ,जिंदगी में भी होती है ,हम   इंसानों का सारा जीवन ही  प्रतिस्पर्धा  से भरा होता है  ,सारी उम्र . और आज यह समीर है कल कोई और होगा ,तू किस-किस से  इस तरह तो लड़ता -झगड़ता रहेगा ?   इस तरह तो तू सबको अपना दुश्मन बना लेगा. यह सही रास्ता नहीं है , समीर  का नुकसान  करते हुए कहीं तेरा  ही भविष्य खतरे में पड़ गया तो ! ”  राहुल,” तो सही रास्ता क्या है माँ ? में ऐसा क्या करूँ की स्कूल में वापिस अपनी वही जगह पा सकूँ,सबका ध्यान,और प्यार पा सकूँ ,,”
राहुल   की   माँ  ने   उससे एक नाते बुक और पेन्सिल मंगवाई ,फिर राहुल को उस   नोट बुक का पन्ना खोलकर  उसके उपर एक  सीधी लाइन   खीचने  को कहा ,.राहुल ने  कापी पर सीधी  लाइन खिची  .फिर माँ ने कहा,”अब इस लाइन को मिटाए बिना तू  इसके  मुकाबले में  दूसरी लाइन कैसे खिचेगा  ,क्योंकि यह तो  बड़ी हो गयी ” राहुल  ने उसी लाइन  के पास  उस लाइन से बड़ी लाइन  खीच दी . तो  राहुल की माँ ने उसे फिर  समझाए,” देखा! यह है सही तरीका आगे बढने  का  ,  जिस तरह तुमने इस लाइन को बिना मिटाए उसके मुकाबले में दूसरी लम्बी लाइन खीच   दी इसी  तरह मेरे बेटे !तू समीर को मिटाए  या उसे नीचा दिखाए  बिना उससे आगे बढ सकते हो.अरे तुम खुद इतने  समझदार ,बुध्धिमान होकर इतने नासमझ कैसे हो गए..तुममे  जोश है बल है ,दिमाग है तो क्यों अपनी शक्ति  इस तरह नष्ट कर रहे हो ? यह सारी शक्ति  उससे आगे बढ़ने में लगाओ .  मेरा मतलब तुम अब भी समीर से आगे बढ़ सकते हो . अपनी कोशिशों  को और आगे बढाओ, अपना सारा ध्यान अपने विकास में लगाओ,अपनी पढाई में लगाओ .  ,इर्ष्या ,द्वेष  तो वोह घुन है जो  इंसान की जिंदगी को  धीरे -धीरे  खत्म कर देती है. तुम्हें अपने आप को मिटाना है  या बनाना है ! ”
माँ की बातें   अब राहुल की समझ में पूरी तरह आ चुकी थी और उसने  खुद से और अपनी माँ से यह वायेदा किया की अब वोह सब कुछ भुलाकर सिर्फ अपनी पढाई पर ध्यान देगा. अर्थात अब वोह कोई भी काम पूरा  ध्यान लगाकर करेगा और दुगनी मेहनत करेगा.  .उसके  दिल –दिमाग के सभी नकारात्मक विचार अब जा चुके थे.  और   उसने खूब दिल लगाकर पढाई की और  विद्यालय  में  तो क्या पुरे शहर में   टॉप  किया.  समीर दुसरे क्रमांक पर रहा. पुरस्कार समारोह में   समीर ने खुद आगे बढ़ के राहुल  को  गले  लगा लिया.  राहुल पहले चोंका  मगर फिर उसने भी उसे बाँहों में ले लिया . और इस तरह राहुल और समीर एक अच्छे और पक्के दोस्त बन गए.

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संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

One Comment

  1. admin February 13, 2018 at 11:40 am

    बहुत ही खूबसूरत प्रेरक रचना …

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