क्या हम गधे हैं?

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क्या हम गधे हैं?

By |2018-02-15T19:19:02+00:00February 15th, 2018|Categories: व्यंग्य|Tags: , , |0 Comments
अरे! गुस्साइये नहीं, ये जो शीर्षक है, वो अपशब्द देने या विवाद खड़ा हेतू करने के लिए नहीं दिया है अपितु एक बालक के निबंध से पढ़े शब्दों की विवेचना है! निम्नलिखित बिंदु जो हैं, वो उस बालक के निबंध से शब्दशः लिए गए हैं:
1.गधा एक बड़ा ही सीधा और भोला प्राणी होता है और ये बोझ ढ़ोने के काम आता है! न केवल ये बोझा ढ़ोता है वरन ये बोझे को एक स्थान से लेकर दूसरे स्थान तक स्थानांतरित भी करता है!
2. गधा बड़ा ही स्वामिभक्त होता है, उसका मालिक उस पर कितना भी अत्याचार करे वो प्रतिकार नहीं करता है अपितु सिर झुकाकर उस मार को अंगीकार करता है!
3. गधा सिर्फ़ खाने के लिए ही जीता है, भले ही उसको कितनी मार मिले परंतु अगर खाना भर-पेट मिल रहा है तो भी वो उस व्यक्ति-विशेष की आश्रय में रहना पसंद करेगा क्यूंकि उसे खाना मिल रहा है!
4. गधे को कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके आसपास क्या हो रहा है, वो सिर्फ अपने स्वार्थ-सिद्धि के लिए ही जीवन जीता है!
5. गधे में विद्रोह करने की कुव्वत नहीं होती है, शायद यही उसकी स्वामिभक्ति का मुख्य कारण है!
न जाने और कितने बिंदु उसके निबंध में थे जो किसी गधे का चरित्र-चित्रण थे, परंतु मैं अब तक संशय में हूँ कि उस बच्चे ने वो निबंध वास्तव में गधे के ऊपर लिखा था या फिर…..!!!
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ek shikshak jisey likhne ka shauk hai

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