होली का रंग लाया उमंग ,

कहता है यारा चल मेरे संग।

बँटती है भंग, बढ़ती हुड़दंग,

गुलाल भरता अंगों पर रंग ।

गोपियाँ करती, ग्वालों को तंग,

प्रेम में रंगता मन का विहंग ।

तन- मन में छाए जैसे अनंग,

सबमें होती मीठी- सी जंग ।

गोविंदाओं का ऐसा है ढंग,

वादियों में छाया नवरंग ।

जो भी करता अपने पे दंभ,

रंग का खुमार करता है भंग।

–डा० उपासना पाण्डेय

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