महसूस जिसको रूह करे वो प्रेम है

जिसमें कोई गर्द न हो
संग कोई शर्त न हो
दूसरे को दर्द न हो
बेलौस हो दिल जीत ले वो प्रेम है
न हो संजोकर रखने की इच्छा
न हो ज़रूरी कोई परीक्षा
करनी न पड़ जाये समीक्षा
जो सदा ख़ालिस रहे वो प्रेम है
जो गीले में ख़ुद सोती है
उदर पहले बच्चे का भरती है
लोरियां गाकर सुलाती है
मां की ऐसी ममता ही प्रेम है
एक डोर में सबको बांधे
केवल ख़ुशियां ही बांटे
पूरा कर दे जो हैं आधे
दूरियों को जो घटा दे वो प्रेम है
दूजा दर्द मेरा हो जाये
ग़म उसका मुझको मिल जाये
और ख़ूबी दूजे की भाये
ऐसी भावना ही तो प्रेम है
महसूस जिसको रूह करे वो प्रेम है !!!

स्वरचित
डॉ आनन्द किशोर
दिल्ली

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