बधाई हो! बधाई हो! महँगाई महोत्सव की समस्त भारतवर्ष को बधाई हो! जी हाँ! हमारे भारत में फिर से महँगाई महोत्सव का आयोजन किया गिया, जिसका उद्घाटन शुद्ध मानव-तेल से किया गया जो इन्सान पर अच्छा-ख़ासा दबाव डालकर निकला जाता है और बहुत ही ज्वलनशील होता है! खैर मंत्री जी ने उद्घाटन करते हुए बड़ा ही शानदार भाषण दिया जिसमे उन्होंने कहा, ” हमारे प्यारे देशवासियों हम महँगाई बढाकर गरीबी उन्मूलन कर रहे हैं और गरीबी ही समस्त भारतवर्ष की समस्या है! इसका निवारणार्थ ही हमने पेट्रोल, दूध, डीज़ल, इत्यादि चीज़ों के दाम बढ़ाने का निश्चय किया है और देश-सेवा के लीये हम आगे भी दाम बढ़ाने को तत्पर रहेंगे!” उस समय तो मैं थोडा सा हैरान हो गया कि महँगाई से गरीबी हटती है के बढ़ती है, परन्तु थोड़े ध्यान-दर्शन के बाद उत्तर तुरंत ज्ञात हो गया! उनकी समझ अनुसार अगर महँगाई बढ़ाएंगे तो गरीब लोग दाल, चावल, आटा, इत्यादि चीज़ें इनकी पहुँच से बाहर हो जायेंगी और भूख और अभावग्रस्त गरीब निश्चय ही काल-कवलित होंगे और देखिये न न रहेगा गरीब तो न होगी गरीबी, ये है हमारे मंत्री जे के कथन का भावार्थ!
खैर इस भाषण से एक बात तो पता चल गयी कि महँगाई हमारे हितार्थ है, अब देखिये न जो काम नेहरु जी, शास्त्री जी जैसे नेता नहीं कर पाए उसे महँगाई ने कैसे क्षणभर में दूर कर दिया! अब देखिये न महँगाई का असर राजनीति में आ गया है जहाँ पहले घोटाले २०-३० करोड़ के हुआ करते थे अब ये मुद्रांक बढ़कर १५००-२००० करोड़ हो गया है! सही बात है अब बेचारे २०-३० करोड़ से कहाँ अपने स्विस बैंकों के खाते चला पायेंगे ऊपर से विदेशों में मंदी की मार और पड़ी थी उसकी पूर्ती भी तो हमारे भारत के ये कर्णधार करेंगे, आखिर भारत खुद भूखा रह जाएगा पर सहिष्णुता की भावना नहीं छोड़ेगा! भारत का तो इतिहास ही यही है के खुद के बच्चे भले ही भूख से बिलबिलायें मगर पडोसी के बच्चे की चीख से हमारे भारत की छाती फट जाती है!
हो सकता है महँगाई के कारण कुछ ऐसे नज़ारे भी पेश आयें, जैसे कि गरीब जो की इस महँगाई से लुप्त होने की कगार पर हैं उनके नाम का एक अजायबघर बन जाए, पेट्रोल शराब की तरह पौव्वों, अध्धों या खम्बों में मिले, दाल दिवाली या होली जैसे बड़े पर्वों पर बने, महंगाई बढाकर सारे के सारे राजनीति के कान्हा भारत की आम जनता रुपी सुदामाओं के निवालों की पोटलियाँ खाली करवा देंगे ताकि खाली पोटलियों को आजके कान्हा मुद्दे के रूप में इस्तेमाल कर सके और आते को महंगा करके मुझे लगता है ये भारत को आधुनिक बनाना चाहते हैं, आप पूछेंगे कैसे? अरे भाई! आटा महँगा बिकेगा तो मजबूरी में जनता ब्रेड वगरह खाएगी और भाई विलायत के विकसित देशों का खाना भी तो यही है, तो भाई हुआ न भारत का आधुनिकीकरण!
मेरे भारत के कर्णधारों! भाई इस महंगाई की सुरसा का मुंह दिन-ब-दिन और चौड़ा होता जा रहा है, भाई हो सके तो किसी हनुमान को बुलाओ जो इसके मुंह पर लगाम लगाये नहीं तो कुछ राम सरीखे लोग भारत में अवतरित हो चुके हैं जिन्होंने रावण के एक सिर यानि भ्रष्टाचार को तो चुनौती दे ही दी है क्या पता अगला निशाना ये “महंगाई-डायन” हो!!!

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