वीरों की धरती लहुरी काशी

मां का आशीर्वाद मिलें जिन वीरों को,
उनका जीवन हो जाये अविनाशी।
कण-कण में वीरता की भावना भरती,
सच्चे वीरों की जननी यह लहुरी काशी।।
अमल कर वीरों की वीरता को मानो,
आज-कल थम जाते हैं ये नभ थल जल।
श्रृद्धासुमन अर्पित कर उनकी शहादत पर,
बारम्बार नमन करते गौरवान्वित ‘मंगल’।।
इकहत्तर के युद्ध में अब्दुल हमीद ने मानो,
शूर-साहसी प्रचण्ड रूप विकराल किया।
न जाने कितने टैंकों को धराशाही कर,
पाकिस्तान की उम्मीदों को तार किया।।
वीरों का उत्साह बढ़ाती परमवीर वीरों,
के वीर हमीद की जन्मस्थली धामुपुर।
वीरता, अदम्य साहस, शहादत, शौर्य का,
परिचय देती ये वीरों की धरती गाजीपुर।।

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मंगल प्रताप चौहान

परिचय- मंगल प्रताप चौहान जी की जन्मतिथि २० मार्च १९९८ ग्राम अक्छोर, राबर्ट्सगंज (जिला-सोनभद्र) है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक करने के पश्चात बहुत ही कम समय में आपके नाम कई कविताओं व अच्छे लेखों का समावेश है।

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