बेटा जो देश पर शहीद हो गया,

मेरे जीवन का नूर खो गया ।

देशभक्ति का जो बीज बो गया,

हीरों में कोहीनूर हो गया ।

उसके जीवन की मुझे चाह थी,

देशभक्ति की उसने चुनी राह थी।

जब भी उसकी पकड़ी बाँह थी,

रगों में देश पर मर-मिटने की चाह थी।

देश की रक्षा उसका जुनून था,

शत्रुओं को देख खौलता ख़ून था ।

शरीर उसका भले लहूलुहान था,

मुख पर कुछ कर गुज़रने का सुकून था।

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