जो हुआ है वो अच्छा रहा
मिल गया है जो बिछड़ा रहा

वक़्त बढ़ता चला जा रहा
प्यार का गीत बजता रहा

सारी दुनिया भली हो गई
नेकियों का इरादा रहा

उम्र गुज़री सदा चैन से
रब को सजदा जो होता रहा

जीत किस्मत में लिक्खी गई
हार का फ़िर न ख़तरा रहा

धड़कनें प्यार में रम गयीं
दिल में संगीत सजता रहा

मिल गया दिल के बदले में दिल
कुछ भी मंहगा न सौदा रहा

साथ में ज़िन्दगी आ गई
यूं सफ़र भी भला सा रहा

ये मुक़द्दर की बाज़ीगरी
हारकर कोई जीता रहा

फल गई हैं दुआयें सभी
सर जो ‘आनन्द’ झुकता रहा

स्वरचित
डॉ आनन्द किशोर
दिल्ली

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