होली

होली

कहने को तो होली है त्योहार मात्र
पर है इसमें अपनेपन की छाया
रंगों की धूम इसी में है भरमार इसी में पकवानों की
न कोई बूढा न कोई बच्चा है
न है जाति पाति कि परिछाया
न कोई अपना है न कोई पराया है
सब त्योहारों से अच्छा है सब इसमें सच्चा है
धमा चौकड़ी करने को भाये
रंग बिरंगे पकवानो से मन अति हरसाए
वैसे तो पकवान बहुत है पर,
है गुजिहा देख के मुह में पानी आये
मेल मिलाप हैं होते सब पराये भी अपने होते
कोई लाल कोई पीला कोई लगाये गुलाल हरा गुलाबी नीला
सब मिल कर उधम मचाते गाते हैं रंगों के गीत
होली है होली आई कह कर शोर मचाते हैं।
गुलाल लगा के कहते हैं बुरा न मानो होली है।
होली है भाई होली है बुरा न मानो होली है।

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This Post Has 2 Comments

  1. Madhulika

    Rang birangi holi ayi

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  2. सुभाष

    थैंक यू

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