होली

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होली

By |2018-02-24T08:16:43+00:00February 24th, 2018|Categories: कविता, होली|Tags: , , |2 Comments

होली

कहने को तो होली है त्योहार मात्र
पर है इसमें अपनेपन की छाया
रंगों की धूम इसी में है भरमार इसी में पकवानों की
न कोई बूढा न कोई बच्चा है
न है जाति पाति कि परिछाया
न कोई अपना है न कोई पराया है
सब त्योहारों से अच्छा है सब इसमें सच्चा है
धमा चौकड़ी करने को भाये
रंग बिरंगे पकवानो से मन अति हरसाए
वैसे तो पकवान बहुत है पर,
है गुजिहा देख के मुह में पानी आये
मेल मिलाप हैं होते सब पराये भी अपने होते
कोई लाल कोई पीला कोई लगाये गुलाल हरा गुलाबी नीला
सब मिल कर उधम मचाते गाते हैं रंगों के गीत
होली है होली आई कह कर शोर मचाते हैं।
गुलाल लगा के कहते हैं बुरा न मानो होली है।
होली है भाई होली है बुरा न मानो होली है।

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2 Comments

  1. Madhulika February 28, 2018 at 11:32 pm

    Rang birangi holi ayi

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  2. सुभाष February 28, 2018 at 11:53 pm

    थैंक यू

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