(08) लघुकथा…..बिजनेस मैन
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वह पचास साल का अधेड़ भिखारी था, जैसे ही कोई रेलगाड़ी स्टेशन में खड़ी होती वह किसी भी डिब्बे में घुसकर भीख माँगने लगता। यह उसकी रोज की दिनचर्या थी।संयोग से एक दिन वह
स्लीपर कोच में सफर कर रहे व्यवसायी के सामने हाथ फैलाकर खड़ा होकर कातर स्वर में बोला…

” साहब !! रूपये आठ आने मुझ गरीब को दे दो.. सुबह से कुछ खाया पिया नही….भगवान आपको बरकत देगा।”
” भिखारी भाई !! ये ठीक है भगवान बरकत देगा, ये उसकी बात हुई पर तुम अपनी तरफ कुछ दो तो मैं भी पैसे दूँ।” व्यापारी मुस्कुराकर बोला ‘काहे मजाक करते हो साहब, मेरे पास देने लायक कुछ नही है, कोई भिखारी किसी को क्या दे सकता है।’
उस सेठ पर भिखारी की बात का कोई असर नही हुआ, उसने उसे कुछ नहीँ दिया। भिखारी वहाँ से चला गया, लेकिन व्यापारी की बात उसे रह रह कर याद आ रही थी, उस रात वह ठीक से
सो नहीँ पाया, वह सोचता रहा, मैं लोगों को बदले में क्या दे सकता हूँ ? अंत में उसने निश्चय किया कि कल से वह एक गेंदा का फूल लोगो को भेंटकर भीख माँगेगा। वह अब लोगों को गेंदा का
फूल देकर भीख मांगने लगा, उसे पहले की अपेक्षा चार गुनी भीख मिलने लगी। भिखारी इस सफलता से बहुत खुश हुआ, उसके पास अधिक पैसा आने लगा, आय बढ़ गई। एक दिन उसने पुनः
विचार किया कि गेंदा की जगह लोगों को ताज़े गुलाब के फूल भेंट किये जायें और “यात्रा मंगलमय हो” कहा जाये, ये प्रयोग उसका सफल रहा, अब उसे लोगो से रूपये दो रुपये की जगह दस का
नोट मिलने लगा।

भिखारी अब सम्पन्न हो गया था, पास के एक गांव में बटाई पर खेत उठाकर फूलो की खेती करने लगा था , लोगो की डिमांड पर बाजार से कम दाम पर वह ताज़ा फूल भेजने लगा था, उसके दिन बदल गये थे, एक दिन फूल लेकर किसी दूसरे कस्बे को वह ट्रेन से जा रहा था।
संयोग से, उसी कोच में उसकी मुलाकात उसी व्यापारी से हो गई जिसने भीख देने से मना किया था, वह उसे पहचान जाता है, अपनी सीट छोड़कर उस व्यापारी के नजदीक गया और व्यापारी के पैर छूकर बोला…….

“आप मेरे गुरु है, आपने मुझे नही पहचाना है, लेकिन मैं आपको कैसे भूल सकता हूँ, साहब जी मै वही भिखारी हूँ, जिसे आपने फ्री में भीख देने से मना कर दिया था। उसने पूरी बात व्यापारी को बताई, व्यापारी अपनी सीट से खड़ा हुआ और उससे हाथ मिलाता हुआ बोला….

भई !! अब हम बिजनेस मैन है, जब भी मिले इसी तरह मिले।
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One Comment

  1. Prakash Patel

    Good story

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