😊😊 चाहत 😊😊

आज फिर तुमसे

बात करने का मन करता है।

इकरार-ए- मोहब्बत को

इज़हार करने का दिल करता है।

जानती हूँ मैं,

मुझसे तुम बहुत दूर हो।

चाहते हुए भी

इस पल आ नहीं सकते।

फिर भी क्यों,

तुम्हें देखने का दिल करता है ?

क्या करूँ मैं ,

बहुत समझाया इस नादान को।

सिर्फ़ तुम्हारे क़रीब,

रहने का दिल करता है।

कैसी है लगन,

यह मेरे मन को लगी ।

सुबहो शाम तुमको

ही याद करने का दिल करता है।

–डा० उपासना पाण्डेय😊

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Upasana Pandey

परास्नातक,संस्कृत, इ०वि०वि०।(लब्ध -स्वर्णपदक) डी०फिल०, संस्कृत विभाग, इ०वि०वि०।

This Post Has 4 Comments

  1. Subodh उर्फ सुभाष

    ये चाहते होती ही ऐसी है
    जो अक्सर याद आती है

    बहुत अच्छे से अपनी भावनाएं लिखी

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  2. Pallo

    Nice Mam

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  3. Anshul

    Loved it…

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  4. Upasana Pandey

    सुबोध, पालो एवं अंशुल जी उत्साहवर्धन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद ।

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