उम्मीद की रोशनी

“पापा हर फ्राईडे को आप आते हो, फिर शाम होते ही आप चले जाते हो, मुझे ना, सारी रात आपकी याद आती है| माँ ने आपको क्यों छोड़ दिया?” – हल्के से सुबकते हुए रोशनी ने कहा|

सूरज ने अपनी बेटी का हाथ कस कर पकड़ लिया, फिर अपने होठों पर शाम के धुंधलके द्वारा क्षितिज पर अँधेरा बिखरने जैसी मुस्कान लाकर कहा, “बेटे, आपकी माँ निशा ने भले ही मुझे छोड़ दिया हो, फिर भी उम्मीद है कि कभी इन नफरत के अंधेरों में मेरी रोशनी शायद ‘हम सभी के साथ’ का रास्ता उसे दिखा दे|”

अब बारी रोशनी की थी, हाथ कस कर पकड़ने की|

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Dr Chandresh Kumar Chhatlani

नाम: डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी सहायक आचार्य (कंप्यूटर विज्ञान) पता - 3 प 46, प्रभात नगर, सेक्टर - 5, हिरण मगरी, उदयपुर (राजस्थान) - 313002 फोन - 99285 44749 ई-मेल -chandresh.chhatlani@gmail.com यू आर एल - http://chandreshkumar.wikifoundry.com ब्लॉग - http://laghukathaduniya.blogspot.in/ लेखन - लघुकथा, कविता, ग़ज़ल, गीत, कहानियाँ, बालकथा, बोधकथा, लेख, पत्र

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