मददगार

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मददगार

 

मदद करो अपनी बन कर मददगार।
जो न इतना कर सके वो मानव है बेकार।।
अंग हैं शरीर के तेरे तारणहार ।
थक क्यों गए कोशिश करो एक बार।।

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About the Author:

सरकारी स्कूल में हिन्दी अध्यापक के पद पर कार्यरत,कालेज के समय से विचारों को संगठित कर प्रस्तुत करने की कोशिश में जुटी हुई , एक तुच्छ सी कवयित्री,हिन्दी भाषा की सेवा मे योगदान देने की कोशिश करती हुई ।

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