मधुर मधुर कभी मंद मंद,,

मधुमासी पवन बलखाय रही है…

रतिके उर में मादकता से,,

काम को भी सुलगाय रही है…..

होली में कृष्णा की ढिठाई,,

मृदुता से राधे निभाय रही है…..

प्रीत में रंग से डूब पूर्णता,,

आराधिके कुम्हलाय रही हैं….

@_वंदना  ,अहमदाबाद

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