होली के इन पावन रंग से

रंग दे मोहे साँबरिया

डाल प्रीति के रंग अनोखे

रंग दे मोरी चूनरियाँ …..

 

प्रीति रंग है बड़ा सुहाना

इससे रंग दे ताना बाना

इसमें रंग गई मीरा राधा

यह किस्सा जाना पहचाना

ऐसो रंग डारो रे काँन्हा

छूटे न सारी उमरिया ……..

 

श्याम रंग में रंगी चूनरियाँ

जब नरसी ने ओडी

सुधि बुधि सब विसरा के

उसने प्रीति हरी से जोड़ी

देख सलोनी साँबरी सूरत

तन मन होय गओ हरिया …..

 

तेरी प्रीति को रंग श्याम है

श्याम रंग से खेलों होरी

रंग लगाओ गोरे गालन पे

कर ले वो तुम वरजोरी

बाँध प्रीति की रीति अनोखी

कर आलिंगन साँबरिया …..

 

लाल हरे ओर नीले पीले

रंग नही मेरे काम के

मैं तो बस रंगना चाहूँ

रंग अनोखे श्याम के

रंगरेजा ऐसा रंग डारो

रंग जावे श्याम चुनरिया ….

 

होली के इन पावन रंग से

रंग दे मोहे साँबरिया…..

 

राघव दुबे

इटावा (उ०प्र०)

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