संघर्ष

काम करने या न करने के,

हजारों बहाने हैं ,

मेरे दोस्त!

तू बता !

तू आज किस ओर है?

तुझे काबू में करना

नामुमकिन तो नहीं

हाँ! मुश्किल जरूर है।

तू बता!

तेरी आज क्या सोच है?

मेरा उत्साह ,मेहनत,चाहत

सब आज मेरे साथ है।

तू बता!

तू आज किसका दोस्त है?

मान जा !!

मत संघर्ष कर

रे मनवा! नाजुक ,

तुझे तो पता है

कि तू बड़ा कमजोर है |

– मुक्ता शर्मा

 

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Mukta Tripathi

सरकारी स्कूल में हिन्दी अध्यापक के पद पर कार्यरत,कालेज के समय से विचारों को संगठित कर प्रस्तुत करने की कोशिश में जुटी हुई , एक तुच्छ सी कवयित्री,हिन्दी भाषा की सेवा मे योगदान देने की कोशिश करती हुई ।

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