हाँ ये पल हों हर पल

पल पल हर पल,
हाँ ये पल हों हर पल
पल पल का, हर पल का
संग मेरे, ऐसा हो बंधन
पल भर दूरी का न अहसास हो
तेरा मेरा साथ हो न दुनिया की कोई बात हो
जब तक तू मेरे साथ है,
नही कोई गम पास है
हँसी खुशी की बात हो
चाहे दिन हो या रात हो
हर पल एक दूजे का यूँ साथ हो
कि बिन एक दूजे के
नही जीने की कोई आस हो
ऐसा तेरा मेरा साथ हो
एक पानी तो एक प्यास हो
हमारी दुनियाँ कुछ यूँ खास हो
चाहे चंद्र पलों क साथ हो
पल भर की भी दूरी का
न अब कोई अहसास हो
पल पल दोनों मिलकर
हर पल को कुछ यूं खाश बनाएं
तेरा दिल हो या मेरा दिल जो धड़के
कि बिन बोले….
हम एक दूजे के दिल का हाल सुनाए
पल पल हर पल,
हाँ ये पल हों हर पल

सुबोध उर्फ सुभाष

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