ईश्वर प्राप्ति
अनुराग कैसा सबसे
मोह छोड़ती जिंदगी
ईश्वर प्राप्ति को मचली
आकाश सी खामोशी
शीतल बयार चलती
अजीब सी बेचैनी
निर्मल पावन जीवन
माथे बीच ज्योति
ओमकार जा मिलती
आते-जाते जीवन
मोह माया में फंसकर
ईष्र्या बैर भी निभाते
ये मेला जिंदगी का
ऐसे ही चलता रहता
बस यही उद्देश्य
परमात्मा में जाकर
आत्मा को मिलना
#नीरजा शर्मा #

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