आज फिर से अपने आप को पुरानी राहों में पाया है
ऐसा लगता है फिर दिल के आँगन में कोई आया है
सपनों की दुनियां में जहाँ दो परवाने बसते थे |
खिलते थे फूल वहां पर और कलियाँ चहकते थे||
साथ में अपने वो बहारें आज फिर से लाया है|
ऐसा लगता है फिर दिल के आँगन में कोई आया है||
उसके आने से खिल गयी जीवन की हर कली|
सांसों में ऐसी खुशबू जैसे मुझे थी पहले मिली||
भीगी जुल्फों में से जैसे आज सावन आया है|
ऐसा लगता है फिर दिल के आँगन में कोई आया है||
नशा उसकी आँखों का था ऐसा आज तक उतरा नहीं|
सारे मयखाने में उस नशे का एक बूंद का कतरा नहीं||
उसे पाकर मैंने दुनियाँ की जैसे सारी जन्नत पाया है|
ऐसा लगता है फिर दिल के आँगन में कोई आया है||
Say something
Rating: 4.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...