दिल के आँगन में कोई आया है

दिल के आँगन में कोई आया है

By |2018-03-08T22:37:56+00:00March 8th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |2 Comments
आज फिर से अपने आप को पुरानी राहों में पाया है
ऐसा लगता है फिर दिल के आँगन में कोई आया है
सपनों की दुनियां में जहाँ दो परवाने बसते थे |
खिलते थे फूल वहां पर और कलियाँ चहकते थे||
साथ में अपने वो बहारें आज फिर से लाया है|
ऐसा लगता है फिर दिल के आँगन में कोई आया है||
उसके आने से खिल गयी जीवन की हर कली|
सांसों में ऐसी खुशबू जैसे मुझे थी पहले मिली||
भीगी जुल्फों में से जैसे आज सावन आया है|
ऐसा लगता है फिर दिल के आँगन में कोई आया है||
नशा उसकी आँखों का था ऐसा आज तक उतरा नहीं|
सारे मयखाने में उस नशे का एक बूंद का कतरा नहीं||
उसे पाकर मैंने दुनियाँ की जैसे सारी जन्नत पाया है|
ऐसा लगता है फिर दिल के आँगन में कोई आया है||

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हिंदी से स्नातक, नेटिव प्लेस जौनपुर उत्तरप्रदेश कविता, कहानी लिखने का शौक

2 Comments

  1. saurabh_1 March 8, 2018 at 10:43 pm

    उत्तम लेखनी है आपकी…आगे बढ़ते रहे….

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  2. Sanjay Saroj "Raj" March 9, 2018 at 10:45 am

    बहुत बहुत धन्यवाद सौरभ जी !!! हौशला आफजाई के लिए

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