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महिला दिवस
आज किस लिए
बस प्रतीत होता है
यह एक मजाक
कहाँ सुरक्षित है
महिला …
नही पता
डर के साये में
निकलने को मजबूर
हे हमारे देश की
नारी
वो हे कैद
एक पंछी की तरह
जो निकलने को आतुर
एक खुले समाज में
उन्हें डर है कि
छपट्टा
मार न दे कोई बाज
भ्रूण हत्या
भी हो रही
कानून को ताक पर
रखकर
बेटियाँ भी
जला दी गई
एक अदद
दहेज के लिए
निःसंदेह महिला दिवस
हे आज किस लिए
महिला का उत्थान
हे कहा
सर्वविदित है
एक भयावह सच
कि सुरक्षित नहीं
एक माँ ,एक बहन
एक स्त्री
ओर एक महिला
ओर उसका
प्रतिबिंव तक
फिर महिला दिवस
आज किस लिए………….??????????

राघव दुबे
इटावा (उ०प्र०)
8439401034

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