व्यापार

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व्यापार

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व्यापार में …….
2122 2122 212

फ़र्क़ धन से आएगा किरदार में
जिस्मों के सौदे हुये व्यापार में

ये कोई मज़बूरियों का जश्न है
क्यों रखा ईमान को बाज़ार में

पेट की ख़ातिर किया है ये गुनाह
फ़र्क़ है शौक़ीन में , लाचार में

कौन जीता कौन हारा कुछ नहीं
खेलना सबको पड़ा संसार में

ख़ुद की ख़ातिर जी लिये बेकार है
राज जीने का छिपा उपकार में

नींव रिश्तों की रखो मज़बूत सी
कर यकीं विश्वास के उपहार में

ये अजब सी बात है पर है ग़ज़ब
वो ही जीता हारता जो प्यार में

दिल को हारा जिस किसी ने, ये कहा
वो मज़ा कब जीत में जो हार में

दिल की दौलत से ज़ियादा कुछ नहीं
मांगना ‘आनन्द’ कैसा प्यार में

स्वरचित
डॉ आनन्द किशोर
दिल्ली, 9891629335
anandkishore2263@gmail.com
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~~~~~~~||| * परिचय *|||~~~~~~~ नाम : डॉ आनन्द किशोर ( Dr Anand Kishore ) उपनाम : 'आनन्द' सुपुत्र श्री लेखराज सिंह व श्रीमती रामरती धर्मपत्नी : श्रीमती अनीता पता : मौजपुर , दिल्ली शैक्षिणिक योग्यता : M.B.,B.S. सक्रिय लेखन : ग़ज़ल, कविता, गीत में विशेष रूझा

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