मुहब्बत की रवायत चाहता हूँ
उजालों की मैं दौलत चाहता हूँ

न बाक़ी नफ़रतें हों दिल में सबके
दिलों में सिर्फ़ उल्फ़त चाहता हूँ

यहां जो आदमी रहते हैं उनमें
परिन्दों जैसी आदत चाहता हूँ

मुहब्बत मिल सके मुझको किसी की
मुक़द्दर की बदौलत चाहता हूँ

हिफ़ाज़त कर सकूं लोगों की जिससे
मैं कोई ऐसी ताक़त चाहता हूँ

मुक़ाबिल आज है तूफ़ान मेरे
ज़रा सी और हिम्मत चाहता हूँ

मनाओ संग मेरे ख़ूब ख़ुशियां
नहीं बदले में कीमत चाहता हूँ

भरोसा मुझ पे कर के सच कहो भी
हक़ीक़त में सदाक़त चाहता हूँ

कभी ‘आनन्द’ में हो जाए पैदा
क़लन्दर की सखावत चाहता हूँ

स्वरचित
डॉ आनन्द किशोर
दिल्ली,9891629335
anandkishore2263@gmail.com
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