शहर से तो तेरे मेरी ये बस्ती भली !

शहर से तो तेरे मेरी ये बस्ती भली ,
सच पूछो तो जिन्दगी महंगी नही सस्ती भली|
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खुदा भी कहे अगर साथ छोरने को तेरे,
कह दुंगा फ़िर उनसे छोड़ना दुनिया की कश्ती भली|
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बची कितनी शराफ़त उनमे जानना हो अगर तो,
पूछो उनसे आंखे स्थिर या फिर मचलती भली |
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लाये हो दुल्हन को तुम इतना क्यू सजाकर,
उसके गहनो से ज्यादा तो घुंघट सरकती भली|
– अनुज शिवम

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Anuj Shivam

संक्षिप्त परिचय

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