जिंदगी और नारी

Home » जिंदगी और नारी

जिंदगी और नारी

अभी कल ही महिला दिवस निकल कर गया ऐसे ही मेरे मन में विचार आया हम औरतों की आखिर आजादी है क्या। शायद हम औरतें कभी नहीं जान पाती आखिर वह हैं क्या, वह जो जिंदगी जी रहीं हैं, क्या यही जिंदगी है, या कुछ और है जिंदगी, और मैं कहां हूँ इस जिंदगी में मुझसे पहले मेरा परिवार, मेरे अपनों के सपने, अपनों की जिंदगी, और अपनों की हर जिम्मेदारी और भी बहुत कुछ, जो हम औरतें खुशी से करती रहती हैं उसको अपने से पहले बहुत कुछ करना होता है बोझ तले दबे अपनी जिम्मेदारी निभाती रहती है उसके अपने सपनों के बीच हकीकत के बीच अपने आप को कहां पा रही हैं, और उसको पता भी नहीं है कि वह इन सब के बीच से निकलना भी चाहती है या नहीं।
आजकल लड़कियों को इतनी सारी जिम्मेदारी देकर कहा जाता है तुम आजाद हो। फिर भी लड़कियां अपनी जिम्मेदारी पुरी करने में लगी रहती है तो भी यही समाज उनके चाल चलन पर कैसे उठती है कैसे बैठती है बोलने की अक्ल है या नहीं सलीके से बाहर जाती है या नहीं यहां तक समाज उसकी हर बात का इम्तिहान ले रहा होता है लड़कियां घर से निकल नौकरियाँ कर रही हैं पुरुष समाज कहता है हमने ऐसा करने की उनको आजादी दी है। ये आजादी है या मजबूरी क्योंकि हर हर कोई सुख सुविधा की जिंदगी जीना चाहता है अकेला आदमी सुख सुविधा का साधन नहीं जुटा पाता और अपनी जिंदगी बेहतर जिंदगी बनाने के लिए औरतों को बाहर जाने के लिए आजादी मिली। पर आजादी? शायद नहीं।
औरतों को समय पर आफिस पहुंचना जरुरी है। घर में बच्चों को स्कूल समय से भेजना बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देना समय पर खाना तैयार करना हर रस्म रिवाज करना और भी जाने कितने काम होते हैं।
इन सबके बावजूद उसके पास अपने सपने पूरे करने के लिए समय ही कहां होता है। इसके बावजूद कहीं अकेली जाना चाहे तो हालात के चलते डर सहम जाती है। जो आदमी ने पैदा कर दिए हैं। दुष्कर्म के नाम पर जो दहशत हर उम्र की की बच्ची औरत के मन में बैठी हुई है जिसके चलते खुले आंसमा में सांस लेने से डरती हैं। पुरुष कमजोरी की सजा हजारों लाखों लड़कियां भुगत रही हैं। जिनका कोई दोष नहीं कसूर नहीं अपनी इज्जत के पीछे सपनों की बलि चढ़ाना उचित समझती हैं।
फिर भी बड़े गर्व से कहा जाता है आज लड़कियां लड़कों के बराबर हैं। लड़कियां आजाद हैं जो चाहे करो उसका जो मन चाहे करे
बस यही सवाल है समाज से या पुरुष प्रधान समाज से कौन-सा वह पल है कौनसी जगह है जहां लड़कियां आजाद है बता सकते हैं????
-नीरजा शर्मा

Say something
Rating: 4.5/5. From 2 votes. Show votes.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment