शायरी

विश्वास पे खड़ा है हर चीज
एक वक्त से लड़ा है हर चीज
‘परिन्दे’ दो पंख से नाप लेते हैं आसमान
आसमान से बड़ा है हर चीज
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एक वजह थी, यूं रुठने की
एक वजह थी, दिल टूटने की
चाँद को सपने देखना, ये मयस्सर नहीं
पर एक वजह थी –
सपने में चाँद टूटने की
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लाश के ढेर पर –
कुत्ते लोट रहे थे
मानो, कह रहा हो
कि इनके लिये कोइ रोने वाला तक नहीं |
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उनकी आंखों में एक हसीन संसार छुपा था
मैं नसीब वाला था –
जो उसने मुझसे आंखें चार कर ली |
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