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By |2018-03-22T20:08:20+00:00March 22nd, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

बात

बात कुछ भी नही होती
बात तो है बन जाती
यह तुम्हारी समझ
बात बिगाडना या बनाना
कान के कच्चों पर
बात असर है कर जाती
जो सोच कर न करोगे
झूटी बात भी सच बन जती
तथ्यों को पहचानो
सत्य को जानो
तब ही बात कुछ बन पाती
अंध विश्वास से तो
मन की,घर की
शांति है जाती।
अंजना योगी
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