गिरहबन्द गजल प्रस्तुत है :-

कुछ हवा का भी रुख जानना चाहिए।।
रूबरू वक्त का आइना चाहिए।

सामने से अगर वो दिखाई न दें।
खिड़कियों से हमें झांकना चाहिए।।

जिन्दगी में अगर कुछ कमी रह गई।
जिन्दा रह के उसे देखना चाहिए।।

जब जुबांनो पे ताले लगे हों कहीं।
हो के खामोश भी बोलना चाहिए।

सामने सच को लाने की खातिर हमें।
भेद जो भी हो सब खोलना चाहिए।।
**जयराम राय **

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