याद बहुत आयें वो बचपन वाले दिन

खेल खिलौनों के संग साथ बिताने वाले दिन

गली मोहल्ले सब की चाहत वाले दिन

न झगड़े और लड़ाई न टेंशन वाले दिन

याद बहुत आयेें वो बचपन की खुशियों वाले दिन

गाँव की गलियाँ वो कच्ची अट्टारियाँ

रंग बिरंगी तितली वो कोयल की कूँके

खट्टी मीठी अमियाँ, जामुन, कैथा और बेरों वाले दिन

मां की लोरी हो या परियों की कहानी

बापू के संग मेलों में चांट हो चूरन औ मुरमुरियों वाले दिन

नलियों और तलाबों में

बहती कागज की नावों वाले दिन

छुहिया पाटी कलम दवायत वो इमला वाले दिन

याद बहुत आयेें वो संडे की छुट्टी वाले दिन

याद बहुत आयेें वो बचपन वाले दिन………

 

सुबोध उर्फ सुभाष

Rating: 3.7/5. From 3 votes. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *