आप जैसा दिलदार कहाँ ?

            मुझ जैसा तलबगार कहाँ ?

आपके तशरीफ़ लाने के बाद,

हमारे दिल पर इख़्तियार कहाँ ?

 

इन पलकों में अब एक क़तरा,

आँसू भी समा  जाए  जहाँ !

आपके  दीदार  के  बाद  ,

इनमें अब वह जगह कहाँ ?

 

सुना है  इस  ज़माने  में ,

खूबसूरती   है   बेइन्तहा !

दिले-अंजुमन में छाई बहार,

बिन आपके एक पल करार कहाँ?

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