..याद बहुत आयें वो बचपन वाले दिन
कितने अच्छे थे छुहिया औ पाटी वाले दिन
याद बहुत आयें कलम,दवायत वाले दिन
आ गए कॉपी और किताबों वाले दिन
कब के छूट गए वो गलती करने वाले दिन
स्कूल में रहते टीचर के लेक्चर
घर में माँ और बाबू जी का डर
एक तरफ शिक्षा की टेंसन
एक तरफ यारों के संग मस्ती वाले दिन
कन्चे, खो- खो और कबड्डी वाले दिन
क्लास रूम में उड़ते रॉकेट और जहाजों वाले दिन
याद बहुत आयें माँ, टीचर और पिताजी जी के हांथो पिटने वाले दिन
माँ की लोरी वो परियों की कहानी वाले दिन
याद बहुत आयें वो संडे की छुट्टी वाले दिन
याद बहुत आयें वो बचपन वाले दिन……….

 

   – सुबोध उर्फ सुभाष

 

Say something
No votes yet.
Please wait...