अनदेखे घाव

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अनदेखे घाव

By |2018-03-26T22:10:28+00:00March 26th, 2018|Categories: अन्य|Tags: , , |0 Comments

अनदेखे घाव

 

ये कैसा पत्थर है जो सब सह जाता है
हाँ ! ये दिल ही है जो हर गम सह जाता है
मन में बसे ख़यालों को पलक झपकते तोड़ा जाता है
उम्मीदों से बिखरा हर-पल को तड़पता छोड़ा जाता है
गर गलती पे भी गलती खुद की हो तो औरों से उम्मीदें रखते हैं
जो गलती से भी गलती औरों की हो तो जज बनके निर्णय करते हैं
गलत हों जो आपकी नज़रों में
क्या खूब इंसाफ हैैं करते
शायद भूले हैं सब सच्चाई को
“हो कितनी भी ऊंची, मजबूत इमारत
जो नीव हिले तो सब ढ़ह जाता है”
ये कैसा पत्थर है जो सब सह जाता है
हाँ ! ये दिल ही है जो हर गम सह जाता है
जब भी उम्मीदें हों अपनों से
हर उम्मीदों का पतझार हुआ
ये एकबार नहीं कई बार हुआ
जो मुख से निकले शब्दों के तीर
सुने जो दिल ने निष्छल सुंदर तानों को
अंतर मन को झकझोर गए
बरसों के सपनों को क्यों एक पल में तोड़ा जाता है
अंजनी राहों में यूँ अचानक क्यों छोड़ा जाता है
ये कैसा पत्थर है जो सब सह जाता है
हाँ ! ये दिल ही है जो हर गम सह जाता है
कहे “सुभाष” एक पते कि बात
सुनो सभी तुम ध्यान लगाय
जब हो मन में गुस्सा भरा हुआ
नहीं करो कोई बात
सोंचो, समझो, तोलो फिर बोलो कोई बात
गुस्से में मुख से जो शब्द उचारे जाते हैं
केवल बिन ज़ख्मों के घाव उभारे जाते हैं
हाँ बिन ज़ख्मों के घाव उभारे जाते हैं

ये कैसा पत्थर है जो सब सह जाता है
हाँ ! ये दिल ही है जो हर गम सह जाता है ।।

सुभाष
25.3.2018

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