रूसवाई

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रूसवाई

By |2018-09-01T10:50:11+00:00March 30th, 2018|Categories: दोहे/मुक्तक/शायरी|Tags: , , |0 Comments

तू कहां मुझसे जुदा हो पाया,
मेरे आशारो में,
क्या तुझे तू नजर नही आता|

यह तो वायदा है महज,
तेरा मुझसे मेरा तुझसे,
के रूसवाई से तडप अच्छी है|

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