लोरी

लोरी

By |2018-04-04T20:52:00+00:00April 4th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

लोरी
चांद और तारे खिड़की से
लाड़ो आकर देखें
बयार चले होले होले
झूला सा सुख देंवे
उठ ना जाए छोटी बहना
चिया सभी को धमकाएं
नवल धवल सा खरगोश
इत उत कूदे फांदे
उठ जाएं लाड़ो बिटिया
उसके साथ साथ खेलें
रंग बिरंगी चिड़ियाँ
उड़ती फिरती
राग अपना सुनावें

Comments

comments

No votes yet.
Please wait...
Spread the love
  • 5
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    5
    Shares

About the Author:

Leave A Comment