कश्ती

कश्ती

परिवार एक कश्ती
उस पर सवार सब माँझी है
रिश्तो का ताना बाना है जिंदगी 
खुशी किनारा
तो गम लहरें है
जैसे समुद्र या नदी जब होती है शांत
तो सब स्थिर होता खुशी समान
अगर हो आवेग पर
तो गमो का साया सा लहराता है
यही कश्ती रूपी ज़िन्दगी हमें पार लगाती है
यही ज़िन्दगी के रूपों से रूबरू कराती है
शालिनी जैन

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