कछुए की भूल

कछुए की भूल

By |2018-01-20T17:07:34+00:00January 19th, 2016|Categories: पंचतन्त्र|0 Comments

 

एक तालाब में कंबुग्रीव नाम का एक कछुआ रहता था | उसी तालाब में प्रतिदिन आने वाले दो हंस, जिनका नाम संकट और विकट था, उसके मित्र थे | तीनों में इतना स्नेह था कि रोज शाम होने तक मिलकर बड़े प्रेम से वार्तालाप किया करते थे |

कुछ दिन बाद वर्षा के अभाव में वह तलब सूखने लगा | हंसो को यह देखकर कछुए से बड़ी सहानुभूति हुई | कछुए ने भी आँखों में आंसू भर कर कहा-“मित्रों, अब मेरा जीवन अधिक दिन का नहीं है | पानी के बिना इस तालाब में मेरा मरण निश्चित है | अगर तुमसे कोई उपाय बन पाए, तो करो | विपत्ति में धैर्य ही काम आता है | यत्न करने से सब काम सिद्ध हो जाते हैं |”

बहुत सोच विचार के बाद दोनों हंसो ने निश्चय किया कि जंगल से एक बांस की छड़ी लायेंगे | कछुआ उस छड़ी के मध्य भाग को अपने मुख से पकड़ लेगा | फिर हम दोनों ओर से छड़ी को मजबूती से पकड़ कर दूसरे तालाब के किनारे तक उड़ते हुए पहुंच जाएँगे |

यह निश्चय हिने के बाद दोनों हंसो ने कछुए से कहा-“मित्र, हम तुझे इस प्रकार उड़ते हुए दूसरे तालाब तक ले जाएँगे, लेकिन एक बात का ध्यान रखना | कहीं बीच में लकड़ी मत छोड़ देना, नहीं तो गिर जाएगा | कुछ भी हो पूरा मौन बनाये रखना | प्रलोभनों की और ध्यान मत देना | यह तेरी परीक्षा का मौका है |”

कछुए ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह इस दौरान बिलकुल भी नहीं बोलेगा | तब हंसों ने लड़की को उठा लिया | कछुए ने उसे मध्य भाग से दृढ़तापूर्वक पकड़ लिया | इस तरह निश्चित योजना के नागरिकों को देखा, गर्दन उठा कर आकाश में हंसों के बीच किसी चक्राकार वस्तु को उड़ता देखकर कौतूहलवश शोर मचा रहे थे |

उनका शोर सुनकर कुम्बग्रीव कछुए ने हंसों से पूछना चाहा-“यह शोर कैसा…|”

लकिन मुहं खोलते ही वह नीचे गिर पड़ा और मर गया |

टिटिहरी ने यह कहानी सुनाकर टिटिहरे से  कहा-“इसलिए मैं कहती हूँ कि अपने हित-चिंतकों कि राय पर न चलने वाला व्यक्ति नष्ट हो जाता है | इसके अतिरिक्त बुद्धिमानों में भी वाही बुद्धिमान सफल होते हैं, जो बिना आई विपत्ति का पहले से ही उपाय सोचते हैं और वह भी उसी प्रकार सफल होते हैं, जिसकी बुद्धि तत्काल अपनी रक्षा का उपाय सोच लेती है | पर ‘जो होगा, देखा जायेगा’ कहने वाले शीघ्र ही नष्ट हो जाते हैं |’

टिटिहरे ने पूछा-“वह कैसे ?”

टिटिहरी बोली-“सुनाती हूँ सुनो |” यह कह कर उसने टिटिहरे को यह कहानी सुनाई |

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