सारा वक्त परेशां से थे हम,
ना जाने क्या शोर था ;
बहुत कुछ टूटने की आवाजें थी,
दिमाग सै सोचा जो इक पल,
तूफां था जो दिल में उठा था|
अंजना योगी

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